वाराणसी, सितम्बर 11 -- Varanasi News: वाराणसी, मुख्य संवाददाता। काशी के गणेशोत्सव में समय के साथ कई बदलाव हुए लेकिन शारदा भवन का आयोजन न सिर्फ अपनी परंपराओं के प्रति दृढ़ है बल्कि धार्मिक मर्यादा के नवीन मानदंड भी स्थापित कर रहा है। आयोजन करने वाले पाठक परिवार ने इस पूजा के उद्देश्य को नहीं छोड़ा है। यही नहीं उच्चतम और उच्च न्यायालय का सम्मान करते हुए भगवान गणेश की प्रतिमा का गंगा या किसी कुंड में विसर्जन भी नहीं किया जाता है। यह भी पढ़ें- गणेश चतुर्थी 2026: 14 सितंबर को घर-घर विराजेंगे गणपति बप्पा, जानें स्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और विसर्जन की तारीखविशिष्ट वनस्पतियों का उपयोग शारदा भवन के आंगन में बड़े से पात्र में गंगाजल भरकर मानस गंगा का आह्वान कर उसमें प्रतिमा विसर्जित की जाती है। उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय ने कुंडों और उ...