वाराणसी, अगस्त 7 -- Varanasi News: वाराणसी, मुख्य संवाददाता। भगवान अपने भक्तों हमेशा ध्यान रखते हैं। भक्त जब भी दुख-सुख में उनको भाव से पुकारेगा, वह नंगे पांव चले आते हैं। चाहे वह ऐरावत हाथी ही क्यों न हो, जिसका पैर मगरमच्छ ने पकड़ लिया था। ये बातें भागवताचार्य पं. आनंद बिहारी शास्त्री ने कहीं। वह वैदिक एजुकेशनल रिसर्च सोसाइटी की ओर से तारानगर कॉलोनी स्थित वेद मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में शुक्रवार को प्रवचन कर रहे थे। 14 दिवसीय कथा के सातवें दिन उन्होंने कहा कि द्रौपदी ने भी जब तक पूरे भाव से नहीं पुकारा था, तब तक प्रभु नहीं आए थे। जैसे ही द्रौपदी ने समर्पण भाव से श्रीकृष्ण का स्मरण किया, प्रभु उपस्थित हो गए। प्रवचनकर्ता ने इस संदर्भ में भक्त प्रह्लाद और ध्रुव का भी उदाहरण दिया। इन दोनों की रक्षा के लिए भी श्रीहरि विष्णु उपस्थित ...