वाराणसी, अगस्त 8 -- Varanasi News: वाराणसी, मुख्य संवाददाता। भगवान को प्राप्त करने के लिए भक्ति महत्वपूर्ण है। समय और उम्र का कोई महत्व नहीं है। बाल्यावस्था में भी भगवत प्राप्ति संभव है। इसके सबसे बड़े उदाहरण ध्रुव हैं। उन्हें मात्र पांच वर्ष की अवस्था में भगवान के दर्शन हो गए थे। ये बातें वृंदावन के युवा संत अभिराम दास ने कहीं। वह भदऊं स्थित श्रीसाईं धाम में हो रही श्रीमद्भागवत कथा में शनिवार को प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यदि हम ईश्वर को प्राप्त करना चाहते हैं तो प्रारंभ से ही हमें उनक प्रति आस्था रखनी होगी। पूर्ण विश्वास के साथ उसकी अर्चना करनी होगी। यह भी पढ़ें- Dehradun News: भक्तों का संशय को दूर करने को भोलेनाथ ने अपनाया गृहस्थाश्रम उन्होंने कहा कि गृहस्थ जीवन सबसे बड़ा धर्म है। गृहस्थ आश्रम से ही वानप्रस्थ और ब्रह्मचारी तपस्...