वाराणसी, जुलाई 10 -- Varanasi News: वाराणसी। सुबह-ए-बनारस आनंद कानन की प्रभाती में शुक्रवार को डॉ. रागिनी सरना का सुमधुर शास्त्रीय गायन हुआ। अस्सी घाट स्थित मंच पर उन्होंने राग नटभैरव के सुर लगाए। विलंबित एकताल में निबद्ध बंदिश 'तन धन क़ी कौन बड़ाई' सुनाने के बाद द्रुतलय एकताल में निबद्ध बंदिश 'देखो सावन की प्रात' सुनाकर श्रोताओं को रससिक्त किया। इसके बाद तीन कजरी सुनाई। 'सखी सावन में मनभावन को' और 'मिर्ज़ापुर कइल गुलजार हो' सुनाने के बाद समापन 'कारी कारी झुकी आई रे बदरिया ना' से किया। उनके साथ तबले पर कृष्ण कुमार उपाध्याय एवं हारमोनियम पर हर्षित उपाध्याय ने संगत की।

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