वाराणसी, जुलाई 9 -- Varanasi News: वाराणसी, मुख्य संवाददाता। महाभारत की पौराणिक गाथा के बहाने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद उपजी वैश्विक हताशा, परमाणु बम के भय और मानवीय मूल्यों के संकट को एक बार फिर विमर्श का विषय बनाया गया। इसका माध्यम धर्मवीर भारती का नाटक 'अंधायुग' का मंचन बना।

नाटक की मंचन प्रक्रिया बनारस यूथ थियेटर की ग्रीष्मकालीन कार्यशाला में तैयार इस नाटक का सफल मंचन उत्कर्ष सहस्रबुद्धे के निर्देशन में बुधवार को आर्य महिला इंटर कॉलेज के सभागार में किया गया। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद संपूर्ण मानवता ने जिस प्रकार का दंश झेला वैसी ही दुखद अनुभूतियों से महाभारत के युद्ध के दौरान और उसके बाद मानव सभ्यता को दो-चार होना पड़ा था।

प्रदर्शन का सार दो अलग-अलग कालखण्डों में उपजी युद्ध की विभीषिका को एकसूत्र में पिरोने में युवा प्रशिक्षुओं की ट...