वाराणसी, सितम्बर 27 -- Varanasi News: वाराणसी। पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने टाउनहॉल में आयोजित काशिका शृंखला की तीसरी कड़ी में राग देस मल्हार से बनारस के संगीत पुरखों को रागांजलि अर्पित की। इस राग में ठुमरी गायन के दौरान उन्होंने कभी बादल के गरजने तो कभी बिजली के चमकने के भावों को सुरों में अभिव्यक्त किया। संवादी शैली के कार्यक्रम में अपने बैठने के खास अंदाज के पीछे की मजबूरी का खुलासा भी उन्होंने किया।

कार्यक्रम में संवाद गायन के बीच ही अचानक संवाद शुरू कर देने से शुरू में मालिनी थोड़ा असहज जरूर हुईं लेकिन बड़ी खूबसूरती के साथ बात संभाल भी ली। साथ ही इस बात से सहज इनकार भी किया कि उनके बैठने का अंदाज कहीं से भी विदुषी सिद्धेश्वरी देवी से मिलता है। मालिनी अवस्थी ने खमाज थाट के राग में ठुमरी 'आए सावन के बदरवा घेरि आए...'मल्हार के रंग दिखाने ...