वाराणसी, अक्टूबर 10 -- Varanasi News: वाराणसी। कई बार कृत्रिम गर्भाधान (आईवीएफ) सफल नहीं हो पाता। ऐसे में महिलाओं को पहले पंचकर्म कराना चाहिए। इसके बाद कृत्रिम गर्भाधान की संभावना भी बढ़ जाती है। यह सलाह कोल्हापुर (महाराष्ट्र) स्थित यशवंत आयुर्वेद कॉलेज की डॉ.विशाला तिरुपति ने दी। वह आईएमएस बीएचयू में चल रहे तीन दिनी प्रसूति कॉन के समापन पर शुक्रवार को विचार व्यक्त कर रही थीं। प्रसूति कॉन का आयोजन आईएमएस के प्रसूति विभाग और केएजीओएफ की ओर से किया गया था। डॉ.विशाला ने कहा कि बांझपन की समस्या से जूझ रहे दंपतियों के उपचार में आयुर्वेद की भूमिका पर भी विचार की जरूरत है। पंचकर्म आयुर्वेद की प्रमुख उपचार पद्धतियों में है। कई जगह इस पर काम भी हो रहा है। गुजरात की डॉ. विनिता ने कहा कि महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के मामले बढ़ते जा रहे हैं। उन्होंने...