वाराणसी, अक्टूबर 14 -- Varanasi News: रामनगर (वाराणसी),संवाददाता। हनुमान श्रीराम के अनन्य भक्त थे तो राम काज करने में कैसे पीछे रहते। मिनटों में सौ जोजन समुद्र लांघ गए। सुरसा को चकित कर दिया और तो और जिस सोने की लंका पर रावण को गुमान था उसे देखते ही देखते जला कर राख कर दिया। रामलीला के 19वें दिन मंगलवार को हनुमान सभी से अपने लौटने की प्रतीक्षा करने के लिए कहकर मैनाक पर्वत पर चढ़े तो पर्वत धंस गया। वे कहते हैं कि राम का कार्य किए बिना मैं विश्राम नहीं करूंगा। उन्हें देखकर सुरसा कहती है कि देवताओं ने आज मुझे अच्छा आहार दिया है। यह भी पढ़ें- Hathras News: दुष्ट हृदय दारुन जस अहिन, पंचवटी सो गई... वह हनुमान को खाना चाहती है तो हनुमान कहते हैं कि अभी जाने दो वापस लौटने पर मुझे खा लेना। वह नहीं मानती। वह अपना आकार बढ़ाने लगी यह देखकर हनुमान भी अ...