वाराणसी, जुलाई 31 -- Varanasi News: वाराणसी। कलियुग में भागवत जीवन जीना सिखाती है। जैसे राजा परीक्षित को ऋषि के श्राप के बाद मात्र सात दिनों में ज्ञान प्राप्त हो गया, श्रीमद्भागवत कथा श्रवण से वह जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो गए, उसी प्रकार कलिकाल में भी श्रीमद्भागवत कथा का प्रभाव है। ये बातें पं. आनंद बिहारी शास्त्री ने कहीं। वह सामने घाट स्थित वेद मंदिर में वैदिक एजुकेशनल रिसर्च सोसाइटी की ओर से आयोजित कथा के दूसरे दिन शुक्रवार को प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का महात्म्य श्रावण में बढ़ जाता है। भक्तों को हरि और हर दोनों की कृपा प्राप्त होती है। अंत में कथा के मुख्य यजमान पं. शिवपूजन शास्त्री ने भागवत पोथी की आरती उतारी और भक्तों में प्रसाद का वितरण किया।

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