वाराणसी, जुलाई 29 -- Varanasi News: वाराणसी, कार्यालय संवाददाता। भेलूपुर दिंगबर जैन मंदिर में पिछले नौ दिनों से चल रहे अष्टाह्निका महापर्व का बुधवार को समापन हुआ। इस मौके पर विश्व शांति महायज्ञ के साथ कई मांगलिक क्रियाएं हुईं। अभिषेक एवं विशिष्ट मंत्र से शांति धारा संपन्न हुई। धर्म सभा में मुनि भावसागर ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च है। उनका आशीर्वाद हजार पुस्तकों के ज्ञान से भी अधिक प्रभावशाली होता है। गुरु जीवन में सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक विज्ञान भी गुरु की भूमिका को स्वीकार करता है। आज भले ही उन्हें मेंटर, टीचर या गाइड कहा जाए, लेकिन उनका कार्य वही है जीवन को दिशा देना। यह भी पढ़ें- वीरों का आभूषण है क्षमा : मुनि भावसागर महाराज इस मौके पर समाज के अध्यक्ष आरसी जैन, वरिष्ठ उपाध्...