वाराणसी, अक्टूबर 2 -- Varanasi News: रामनगर, संवाददाता। आज तो समूची अयोध्या इतरा रही थी। क्यों न इतराती आखिर एक साथ राजमहल में चार बहुओं के पांव जो पड़े थे। उसमें में एक जनकनंदिनी सीता थीं जिनका श्रीराम के साथ मिलन ही दैवीय प्रेरणा से हुआ। राजा जनक को पुत्री विदा करने का स्वाभाविक दुःख था लेकिन एक संतोष भी था कि सीता जिसकी अर्धांगिनी बनी है वह असाधारण हैं। रामनगर की रामलीला के सातवें दिन गुरुवार को उक्त प्रसंग सजीव हुए।

राजा जनक की विदाई की रस्म अयोध्या के द्वार पर पालकी में बैठे श्रीसीताराम की दिव्य झांकी लोगों को सम्मोहित कर गई। इससे पूर्व राजा जनक ने विदाई से पहले के लोकाचार निभाए। राजा दशरथ को जेवनार के लिए बुलाया गया। जनकपुर की स्त्रियां परंपरानुसार गारी गाने लगीं। बारात विदाई के दौरान राजा जनक, सुनयना और श्रीराम जानकी के मार्मिक सं...