वाराणसी, नवम्बर 1 -- Varanasi News: वाराणसी, मुख्य संवाददाता। मन को वश में रखना वायु को मुट्ठी में पकड़ने जैसा है। अभ्यास एवं वैराग्य के माध्यम से इसकी भी सिद्धि हो जाती है। उक्त विचार बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. गिरिजाशंकर शास्त्री ने व्यक्त किए। वह बीएचयू के मालवीय भवन में रविवासरीय गीता प्रवचन में आत्म संयम योग विषय पर बोल रहे थे। प्रो.शास्त्री ने कहा कि हमारी सारी इंद्रियां अपने-अपने विषयों की ओर सदा उन्मुख रहती हैं परंतु मन रूपी लगाम से उनको वश में करने का उपदेश भगवान श्रीकृष्ण ने दिया। गीता के अनुसार योग का तात्पर्य आत्म संयम से है। यह भी पढ़ें- Hajipur News: भगवान के प्रति समर्पण और भक्ति से होती है आत्मा की शुद्धि :कथावाचक माध्वाचार्य आरंभ में अतिथियों का स्वागत गीता समिति के ...