नई दिल्ली, अप्रैल 9 -- अमेरिका-ईरान के बीच संघर्ष विराम कराने के लिए कई पश्चिमी देशों ने पाकिस्तान की भूमिका की सराहना की है। देशों ने इसे उसकी कूटनीतिक सफलता बताया है, लेकिन पाकिस्तान की यह वाहवाही तात्कालिक है तथा उसे इसका कोई दूरगामी फायदा होने की उम्मीद नहीं है। भारतीय विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध विराम में पाकिस्तान की भूमिका महज संदेशों के आदान-प्रदान तक ही सीमित रही है। युद्ध विराम का खाका तैयार करने में उसकी कोई भूमिका नहीं है।मध्यस्थ नहीं, माध्यम बना पाकिस्तान पूर्व विदेश सचिव निरुपमा राव ने एक्स पर लिखा कि इस संघर्ष को रोकने में पाकिस्तान की भूमिका एक आर्किटेक्ट के रूप में नहीं बल्कि एक माध्यम के रूप में रही है। पाकिस्तान ने इस मामले में वह रास्ता दिया जिसके माध्यम से संदेशों का आदान-प्रदान हुआ। समय सीमाएं नरम पड़ीं और कूटनीति...
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