हेमलता कौशिक, मार्च 31 -- दिल्ली हाई कोर्ट ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2026 में ऑटिज्म, मानसिक बीमारी और सीखने की अक्षमता जैसी दिव्यांग श्रेणियों को आरक्षण से बाहर रखने के खिलाफ दायर याचिका पर केंद्र सरकार और यूपीएससी से जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन उम्मीदवारों को परीक्षा में बैठने तो दिया जाता है लेकिन आरक्षण और सेवा आवंटन का लाभ नहीं मिलता जो दिव्यांगजन अधिकार कानून और संविधान द्वारा दिए गए समानता के अधिकार का उल्लंघन है। अदालत ने संबंधित विभागों को 4 हफ्त में जवाब देने का निर्देश दिया है। केंद्र सरकार और UPSC से मांगा जवाब मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय एवं न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने सिविल सेवा परीक्षा में ऑटिज्म, बौद्धिक दिव्यांगता, विशेष सीखने की अक्षमता व मानसिक बीमारी से पीड़ित उम्मीदवारों को...
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