सुपौल, अक्टूबर 25 -- Supaul News: त्रिवेणीगंज, निज प्रतिनिधि। दशहरा-​दिवाली, छठ और शादी-विवाह का सीजन शुरू होते ही बाजार में मिठाइयों की माँग के साथ ही खुशबू और रौनक बढ़ जाती है। लेकिन आम लोगो को पता नहीं होता है कि इस चमक-दमक के पीछे मिलावट का सिंडिकेट का एक खतरनाक और भयावह काला सच छिपा होता है। अनुमंडल और आसपास के इलाकों में त्योहारों के दौरान मावा (खोवा), पनीर, घी और दूध की मांग अचानक कई गुना बढ़ जाती है। इस भारी मांग और आपूर्ति के अंतर का फायदा उठाकर मिलावटखोर सक्रिय हो जाते हैं, जो खतरनाक रसायनों और डिटर्जेंट से तैयार सिंथेटिक दूध और नकली मावा धड़ल्ले से बाजार में खपाते है। जानकर बताते हैं कि त्योहार के सीजन में ​बाजार में मिलने वाला नकली मावा दूध को उबालकर नहीं, बल्कि हानिकारक तत्वों से तैयार किया जाता है। ​नकली मावा में स्टार्च, उब...