सुपौल, जुलाई 3 -- Supaul News: सुपौल, हिन्दुस्तान संवाददाता। पारंपरिक कारीगरों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना जिले में धीमी रफ्तार का शिकार है। योजना लागू होने के करीब तीन साल बाद भी लाभुकों तक आर्थिक सहायता समय पर नहीं पहुंच पा रही है। स्थिति यह है कि प्रशिक्षण पूरा करने और सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद 472 से अधिक चयनित लाभुक उद्योग कार्यालय और बैंकों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। इससे योजना के प्रति लाभुकों में निराशा बढ़ रही है। यह भी पढ़ें- विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के लिए पात्र करें आवेदनयोजना की जानकारी जिले में योजना शुरू होने के बाद 10 हजार से अधिक लोगों ने ऑनलाइन आवेदन किया था। जांच के बाद 723 आवेदकों का चयन किया गया और उन्हें विभिन्न ट्रेडों का प्रश...