जयपुर, जून 27 -- सरकारी अस्पतालों में मरीज उम्मीद लेकर आते हैं कि यहां इलाज मिलेगा, लेकिन जब इलाज से जुड़ी जरूरी फाइलें ही एक बंद कमरे में कैद हो जाएं, तो सवाल सिर्फ व्यवस्था पर नहीं, पूरी प्रशासनिक जवाबदेही पर उठने लगते हैं। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एसएमएस मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक से सामने आया मामला कुछ ऐसा ही है, जहां रिटायरमेंट के 27 दिन बाद भी एक वरिष्ठ डॉक्टर का चैंबर उसी शान से बंद पड़ा है। दरवाजे पर उनका नाम आज भी चमक रहा है और कमरे का ताला अब भी वैसा ही लटका हुआ है, जैसे मानो उसके खुलने का इंतजार अभी खत्म ही नहीं हुआ।चार्ज दिया, लेकिन चाबी और फाइलें कमरे में ही छोड़ गए पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. धनंजय अग्रवाल सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। विभाग का प्रशासनिक चार्ज उन्होंने अपने जूनियर डॉ. विनय मल्होत्रा को सौ...