सीवान, सितम्बर 24 -- Siwan News दरौंदा, एक संवाददाता। करीब आठ साल पहले घर से निकली एक बेटी की यादें वक्त के साथ धुंधली पड़ गईं। मानसिक स्थिति ठीक नहीं रहने के कारण वह अपना नाम, पता और परिवार के बारे में भी ठीक से कुछ नहीं बता पाती थी। कभी पूर्णिया तो कभी कटिहार का नाम बताती थी। इन वर्षों में वह कोलकाता के एक अस्पताल में रहकर उपचार कराती रही। लगातार इलाज और दवाओं के बाद जब उसकी स्थिति में सुधार हुआ तो उसे अपने गांव और पिता का नाम याद आया। अब उसके परिवार तक पहुंचने की उम्मीद जगी है। बताया गया कि प्रखंड के कौथुआ सारंगपुर गांव की शबनम खातून करीब आठ वर्षों से कोलकाता के एक अस्पताल में रह रही थी। मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण अस्पताल में उपचार के बावजूद वह अपने घर-परिवार की सही जानकारी नहीं दे पा रही थी।

उपचार प्रक्रिया उपचार के साथ उसे ...