सीतामढ़ी, अक्टूबर 25 -- Sitamarhi News: सोनबरसा। गरीबी ऐसी कि अपना घर तक नसीब नहीं हुआ। गुजर-बसर के लिए किराये की झोपड़ी का सहारा लेना पड़ा। पेट की आग बुझाने के लिए कम उम्र में ही दोनों बेटों को कमाने के लिए घर से बाहर भेजना पड़ा। इसी बेबसी के बीच कभी जरूरत पड़ने पर पांच हजार रुपये कर्ज लिए थे। परिजनों और ग्रामीणों का दावा है कि उस रकम के बदले 35 हजार रुपये ब्याज चुका दिए, फिर भी दो हजार रुपये बकाया बताया जा रहा था। आखिर इस कर्ज से मुक्ति कब मिलती, यह रहमान नहीं जान सके। तिलंगही गांव में उनकी मौत के बाद पांच हजार के कर्ज और 35 हजार रुपये ब्याज का यह हिसाब अब कई सवाल छोड़ गया है। जिस परिवार के पास पहले से ही मुश्किलों से लड़ने के अलावा कोई रास्ता नहीं था, उसके सिर से अब घर के मुखिया का साया भी उठ गया। परिजनों और ग्रामीणों के मुताबिक, रहमान...