नई दिल्ली, अक्टूबर 5 -- भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और कुछ रिटायर्ड जजों ने सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्जल भुइयां के उस बयान की आलोचना की है, जिसमें उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लाखों लोगों के मताधिकार से वंचित करने वाली प्रक्रिया बताया था। जस्टिस भुइयां ने रविवार को हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि कोई भी ऐसी प्रक्रिया, जो लाखों भारतीय नागरिकों को वोट के अधिकार से दूर करे, मनमानी है और संविधान के खिलाफ है। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान नागरिकों को दो वर्गों में नहीं बांटता, एक जिसके पास वोट का अधिकार हो और दूसरा जिसके पास न हो।बीआर गवई ने क्या कहा? इस बयान पर सोमवार को पीटीआई से बात करते हुए पूर्व सीजेआई बीआर गवई ने कहा कि न्यायिक मर्यादा उन्हें ऐसे मामले पर टिप...