सिमडेगा, अगस्त 21 -- Simdega News: सिमडेगा, प्रतिनिधि। सब्जी मंडी की भीड़, लहसुन-मिर्च की ढेरी और पथराई आंखों से ग्राहकों का इंतजार करतीं 70 वर्षीय मंजू देवी का जीवन उस ढलती शाम की तरह है जहां अब कोई रोशनी बाकी नहीं बची। शहरी क्षेत्र के सलडेगा मोदीटोली में अपनी बहन के बेटे के घर एक कोने में आसरा लिए मंजू देवी की न अपना कोई छत है और न ही कोई अपना सहारा। न कभी उसे पति का साथ मिला और न कभी गोद में बच्चों की किलकारियां गूंजीं। मंजू देवी बताती हैं कि बचपन में जब वह जीवन का मतलब भी ठीक से नहीं समझती थीं, तभी उनका गौना हुआ था। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। शादी के कुछ ही समय बाद पति का देहांत हो गया और वह एक दिन भी ससुराह नहीं जा पाई। भरी जवानी और पूरी उम्र उन्होंने अकेलेपन के साए में गुजार दी और दोबारा कभी घर नहीं बसाया। उम्र के आखिरी पड़...