Shiv Katha: जब शिव जी से पिप्पलाद ने प्रतिशोध में मांगा वरदान, फंस गए थे खुद के संकट में प्राण
नई दिल्ली, सितम्बर 1 -- Shiv ji ki Kahani: वरदान बहुत सोच-समझकर मांगना चाहिए। बिना विचारे मांगे गए वरदान से कई बार मांगने वाले का ही अहित हो जाता है। इस संबंध में एक कथा है। दधीचि मुनि ने इंद्र की सहायता के लिए स्वेच्छा से अपनी देह त्याग दी। उनकी हड्डियों से बने वज्र से वृत्रासुर का वध हुआ। ऋषि दधीचि के पुत्र पिप्पलाद ने यह समझा कि उनके पिता को इंद्र ने मारा है। वह प्रतिशोध की अग्नि में जलने लगा। यह भी पढ़ें- सितंबर में एकादशी कब-कब है? जान लें व्रत की डेट और व्रत पारण का मुहूर्तभगवान शिव से मांगा पिप्पलाद ने वरदान पिप्पलाद ने कठोर तपस्या करके शिव से वर मांगा, 'हे भोलेनाथ! आप अपना तीसरा नेत्र खोलकर इंद्र सहित सभी देवताओं को भस्म कर दिजिए।' शिव ने पिप्पलाद से पूछा, 'हे भक्त! तुमने क्या इसलिए तपस्या की है कि मैं अपना तीसरा नेत्र खोलकर पूरे ...
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