Shiv ji ki kahani: भगवान शिव के तीसरे नेत्र की कैसे हुई उत्पत्ति? पौराणिक कथा से जानें रहस्य
नई दिल्ली, अगस्त 7 -- Bhagwan Shiv ko teesri aankh kaise mili: शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव की तीन आंखें हैं। तीसरी आंख शक्ति, प्रलय (संहार), दिव्य ज्ञान और सर्वोच्च चेतना का प्रतीक है। इसे 'त्रिनेत्र' या 'ज्ञान चक्षु' कहा जाता है। शिव जी की दाहिनी आंख सूर्य और बाईं आंख में चंद्रमा का वास है। भगवान शंकर की तीसरी आंख विनाश और सृजन दोनों का द्वार मानी जाती है। कहा जाता है कि जब धर्म के विरुद्ध कोई काम होता है, तब उनका यह नेत्र खुलता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान शिव का तीसरा नेत्र कैसे प्रकट हुआ? पढ़ें यहां पौराणिक कथाएं। यह भी पढ़ें- भगवान शिव ने मगरमच्छ बनकर क्यों ली थी माता पार्वती की परीक्षा? पढ़ें पौराणिक कथाभगवान शिव के तीसरे नेत्र की उत्पत्ति से जुड़ी पौराणिक कथा: पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार माता पार्वती ने भगवान शिव की पी...
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