नई दिल्ली, मार्च 9 -- हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की सप्तमी को शीतला सप्तमी और अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी मनाई जाती है। कई जगहों पर इसे बसौड़ा या बसोड़ा भी कहा जाता है। इस दिन बासी खाना खाया जाता है। माता शीतला को भी बासी खाने का भोग लगाया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि शीतलता की देवी माता शीतला ठंडा प्रसाद ग्रहण करती हैं। इसलिए इस दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता और एक दिन पहले बना हुआ ठंडा भोजन ही माता को भोग लगाया जाता है। जिस दिन शीतला सप्तमी की पूजा करनी हो तो एक दिन पहले छठी के दिन रात को प्रसाद का खाना बनाया जाता है। अगर अष्टमी की पूजा करनी है, तो एक दिन पहले सप्तमी की रात को खाना बनाया जाता है।कैसे होती है माता शीतला की पूजा जिस भी दिन आपके यहां पूजा होता है, सप्तमी या अष्टमी को तो उस दिन स्नान करके मंदिर जा...