नई दिल्ली, अक्टूबर 25 -- Sharad Purnima Vrat Katha: शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की पूजा और खीर चढ़ाने के साथ व्रत कथा सुनने की भी परंपरा है। इस दिन कई घरों में शाम को पूजा के बाद साहूकार की दो बेटियों वाली कथा पढ़ी जाती है। कथा में दो बहनों का प्रसंग आता है। दोनों पूर्णिमा का व्रत रखती थीं, लेकिन उनके व्रत करने के तरीके अलग थे। मान्यता के अनुसार, इसी अंतर के कारण छोटी बहन को जीवन में दुख का सामना करना पड़ा। बाद में उसे व्रत का महत्व समझ आया। शरद पूर्णिमा पर इस कथा को पढ़ने और सुनने का विशेष महत्व माना जाता है।आइए जानते हैं साहूकार की दो बेटियों की पूरी व्रत कथा और इससे जुड़ी मान्यताशरद पूर्णिमा व्रत कथा प्राचीन समय की बात है। एक नगर में एक साहूकार रहता था। उसकी दो बेटियां थीं। दोनों बेटियां पूर्णिमा का व्रत रखती थीं, लेकिन बड़ी बेटी पूरे विधि...