शामली, जुलाई 28 -- Shamli News: झिंझाना। धार्मिक भक्त समाज के तत्वावधान में आयोजित संध्याकालीन सत्संग में सोमवार को संत स्वरूपानंद गिरी महाराज ने श्रद्धालुओं को सत्संग की महिमा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सत्संग को सदैव दत्तचित्त होकर सुनना चाहिए और उसके उपदेशों का मनन करना आवश्यक है। यही मनुष्य के लोक और परलोक दोनों का कल्याण करने का सर्वोत्तम मार्ग है। संत स्वरूपानंद गिरी ने कहा कि सत्संग से विवेक जागृत होता है और विवेक से सत्य तथा असत्य का बोध होता है। जब मनुष्य आत्मज्ञान प्राप्त कर लेता है तो उसे कण-कण में ईश्वर का दर्शन होने लगता है। उन्होंने सभी से उत्तम साहित्य पढ़ने तथा महान व्यक्तित्वों के विचारों को सुनने का आह्वान करते हुए कहा कि ऐसे विचार जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और प्रेरणा का स्रोत बनते हैं।इस यह भी पढ़ें- रा...