शामली, सितम्बर 10 -- Shamli News: थानाभवन। थानाभवन नगर की अग्रवाल धर्मशाला मे चल रही श्री मद् भागवत कथा के पाचवे दिन कथा व्यास राज दास महाराज ने कहा भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि वे अहंकार शमन, दिव्य प्रेम, और कर्म के आध्यात्मिक दर्शन का प्रतीक हैं।इनका उद्देश्य भक्तों के मन से अज्ञानता को मिटाकर उन्हें ईश्वरीय प्रेम से जोड़ना था। पूतना अहंकार और दुर्भावना का प्रतीक थी। प्रभु ने उसका वध कर उसे माता के समान स्थान दिया। यह दर्शाता है कि जो भी सच्चे भाव से ईश्वर की शरण में जाता है, उसका उद्धार निश्चित है।

गोवर्धन पर्वत का महत्व माखन श्वेत और शुद्ध होता है। यह मनुष्य के हृदय में छिपे निर्मल और निष्कलंक भक्ति प्रेम का प्रतीक है। कान्हा का माखन चुराना यह दर्शाता है कि ईश्वर अहंकार रूपी बाह्य आवरण को तोड़कर अंतर्मन के श...