शामली, सितम्बर 22 -- Shamli News: शामली। शहर के श्री श्वेतांबर जैन स्थानक मंदिर ओर से आयोजित चातुर्मास कार्यक्रम में संघ संचालक श्री नरेश मुनि गुरुदेव ने दस लक्षण धर्म के सातवें उत्तम तप धर्म पर प्रवचन किया। उन्होंने कहा कि इच्छाओं का अभाव या उनका नाश करना ही वास्तविक तप है। जिस प्रकार सोना अग्नि में तपकर शुद्ध और चमकदार बनता है, उसी प्रकार तप रूपी अग्नि से आत्मा के कर्मों का मल जलकर आत्मा शुद्ध होती है। नरेश मुनि ने बताया कि जैन शास्त्रों में तप के दो मुख्य भेद बताए गए हैं। पहला बाह्य तप, जिसके छह प्रकार हैं। इनमें अनशन यानी इच्छा होने पर भोजन का त्याग, ऊनोदर यानी भूख से कम भोजन करना, वृत्ति परिमाण यानी आहार के नियम निर्धारित करना, रस परित्याग यानी विभिन्न रसों का त्याग, काय क्लेश यानी शरीर की सहनशक्ति के अनुसार कष्ट सहना तथा विविक्त शय्...