नई दिल्ली, अगस्त 2 -- सावन में शिव रूद्राष्टकम का पाठ आप करते होंगे, लेकिन यह कहां से आया और कहां से लिखा गया, इसके बारे में क्या आप जानते हैं। इसका क्या अर्थ है, इसको जानने की कोशिश आपने की है। आज सावन के पहले सोमवार को हम इसी बारे में बताएंगे। शिव रूद्राष्टकम का वर्णन तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस के उत्तरकांड में आता है। रामायण में ही इसका जिक्र है। जिसमें यह लिखा गया है। रामायण में जब कागभुशुण्डि जी गरूड़ को अपने पूर्व जन्म की कथा सुनाते हैं वो उस घटना का वर्णन करते हैं जब वो शिव की पूजा में लगे थे तो तभी उनके गुरु वहां आ पहुंचे। लेकिन कागभुशुण्डि जी ने अभिमानवश उन्हें प्रणाम नहीं किया। गुरुजी भी बुरा ना मानें, लेकिन शिव को इस बात पर बहुत गुस्सा आया। पर गुरुका अपमान बहुत बड़ा पाप है; अतः महादेवजी उसे नहीं सह सके। मन्दि रमें आकाशव...