सासाराम, नवम्बर 4 -- Sasaram News: रोहतास, एक संवाददाता। कभी दीपावली की रौनक मिट्टी के दीयों के बिना अधूरी मानी जाती थी। त्योहार से कई दिन पहले कुम्हारों के घरों में चाक की रफ्तार तेज हो जाती थी। लेकिन बदलते दौर में चाइनीज लाइट और रंग-बिरंगी झालरों की बढ़ती मांग ने कुम्हारों के पुश्तैनी कारोबार की चमक फीकी कर दी है। इसके बावजूद रोहतास के बुजुर्ग कुम्हार ऋषि मुनि प्रजापति आज भी अपने हुनर और मेहनत से इस पारंपरिक कला को जीवित रखने में जुटे हैं। यह भी पढ़ें- Bhagalpur News: लखीसराय : इस दीपावली जलाएं मिट्टी के दीये, पर्यावरण संरक्षण का दें संदेश यह भी पढ़ें- Bokaro News: इलेक्ट्रिक चाक ने कुम्हारों के पुश्तैनी कारोबार को दी नई जिंदगी यह भी पढ़ें- Ghatsila News: मौसम की मार से कुम्हारों का व्यवसाय संकट में, दीए न सूखने से आमदनी हुई आधी

हिंदी ...