संभल, अक्टूबर 27 -- Sambhal News: सरायतरीन का हड्डी-सींग शिल्प केवल कारोबार नहीं, बल्कि पीढ़ियों से संजोई गई हुनरमंदी और परंपरा की जीवंत विरासत है। मुगलकाल से चली आ रही इस कारीगरी ने सींग की कंघी बनाने से सफर शुरू किया और आज इसके उत्पाद देश-विदेश के बाजारों तथा बड़े फैशन ब्रांडों तक पहुंच रहे हैं। पुराने औजारों से लेकर आधुनिक मशीनों तक का यह बदलाव शिल्प की समृद्ध कहानी बयां करता है। दो जीआई टैग और एक आधुनिक कॉमन फैसिलिटी सेंटर ने इस पारंपरिक उद्योग को नई पहचान और संभावनाएं दी हैं। सरायतरीन में हड्डी-सींग से कलात्मक वस्तुएं बनाने का काम लंबे समय से होता आ रहा है। यहां के कारीगरों ने सीमित संसाधनों और पारंपरिक औजारों के सहारे अपने हुनर को देश-दुनिया तक पहुंचाया है। पहले सींग की कंघी जैसे उत्पाद प्रमुख थे, लेकिन समय के साथ मांग और फैशन में ब...