सहारनपुर, सितम्बर 24 -- Saharanpur News: चिलकाना। दिगंबर जैन मंदिर में दशलक्षण पर्व के नौवें दिन उत्तम आकिंचन धर्म की पूजा श्रद्धा के साथ हुई। पंडित तनिष्क शास्त्री ने कहा कि मन, वचन और कर्म से परिग्रह की भावना छोड़ना ही आकिंचन धर्म है। 'मेरा-तेरा' का मोह त्यागकर जरूरत के मुताबिक वस्तुओं का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे लालच और संग्रह की प्रवृत्ति कम होती है। रात में अलका जैन ने धार्मिक प्रश्न मंच कराया, जिसमें श्रद्धालुओं ने उत्साह से भाग लिया। विजेताओं को पुरस्कार दिए गए। शांति धारा अंकुर जैन ने की। महिला, पुरुष और बच्चों ने पूजा में हिस्सा लिया। गुरु रविदास की बाल लीलाओं का कथा में वर्णनचिलकाना। यह भी पढ़ें- पर्युषण पर्व : मोक्ष मार्ग की सीढ़ी है आकिंचन धर्म मोहल्ला कोठीवाला में चल रही श्री गुरु रविदास महाराज की साप्ताहिक अमृतमयी कथा के चौ...