रांची, अक्टूबर 4 -- Ranchi News: रांची, प्रमुख संवाददाता। चुटिया स्थित महर्षि मेंहीं आश्रम में आयोजित पक्ष ध्यान साधना शिविर के आठवें दिन रविवार को स्वामी डॉ. निर्मलानंद महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि 'मैं और मेरा' का भाव ही माया है, जिसका वास्तविक अस्तित्व न होते हुए भी वह सत्य प्रतीत होती है। स्वामी जी ने स्पष्ट किया कि स्थूल, सूक्ष्म, कारण और महाकारण चारों जड़ शरीर हैं। जब तक जीव इनसे घिरा रहता है, वह परमात्मा का साक्षात्कार नहीं कर सकता। इन सबसे परे कैवल्य शरीर है, जहां नादानुसंधान के माध्यम से पहुंचकर जीव अपना और ईश्वर का बोध प्राप्त करता है। अंत में सार शब्द में लीन होने पर द्वैतता समाप्त हो जाती है और जीव-ब्रह्म एक हो जाते हैं। कार्यक्रम में स्वामी श्यामानंद और अध्यक्ष राजकुमार दास सहित कई साधक उपस्थित रहे।...