नई दिल्ली, अप्रैल 5 -- वैदिक ज्योतिष में राहु को 'छाया ग्रह' माना जाता है। यह भ्रम, तीव्र इच्छाओं, अचानक बदलावों और अप्रत्याशित घटनाओं का कारक है। राहु महादशा लगभग 18 वर्षों तक चलती है और व्यक्ति के जीवन में गहरे परिवर्तन लाती है। कई लोग इस दशा को लेकर डरते हैं, लेकिन यह केवल चुनौतियां ही नहीं, बल्कि आत्म-विकास, नई सीख और अनोखी उपलब्धियों का भी समय हो सकता है। राहु व्यक्ति को बाहरी माया से ऊपर उठाकर अपनी असली इच्छाओं और वास्तविकता का सामना कराता है।राहु महादशा की शुरुआत और अवधि राहु महादशा का आरंभ व्यक्ति की जन्म कुंडली में चंद्रमा की स्थिति और नक्षत्र पर निर्भर करता है। यदि जन्म आर्द्रा, स्वाति या शतभिषा नक्षत्र में हुआ हो, तो जीवन की शुरुआत ही राहु महादशा से होती है। यह महादशा सामान्यतः मंगल महादशा के बाद और गुरु महादशा से पहले आती है। ...
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