नई दिल्ली, अगस्त 17 -- भगवान शिव और माता पार्वती का संबंध हिंदू धर्म में आदर्श दांपत्य का प्रतीक माना जाता है। उनका रिश्ता केवल पति-पत्नी का नहीं बल्कि विश्वास, सम्मान, समानता और आध्यात्मिक जुड़ाव का भी उदाहरण है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में रिश्तों में दूरी आना आम बात हो गई है। ऐसे में भगवान शिव और माता पार्वती के जीवन से मिली ये 5 सीख अगर अपनाई जाएं, तो रिश्तों में मधुरता और स्थिरता बनी रह सकती है।प्रेम का आधार समर्पण और धैर्य है माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या की और वर्षों तक अटूट विश्वास बनाए रखा। भगवान शिव ने भी उनके प्रेम और धैर्य का सम्मान किया। यह प्रसंग सिखाता है कि सच्चा रिश्ता केवल आकर्षण या भावनाओं से नहीं चलता है। उसमें धैर्य, त्याग और एक-दूसरे के प्रति सच्ची निष्ठा भी जरूरी होती है। समय के साथ यही गुण र...