Quote of the Day: बार-बार सोचकर परेशान है मन? गीता की ये 7 सीख चिंता दूर कर ओवरथिंकिंग से देंगी राहत
नई दिल्ली, सितम्बर 1 -- आज की भागदौड़ में शरीर से ज्यादा मन थका लगता है। कोई पुरानी बात बार-बार घूमती है, किसी की कही बात पर सवाल उठते रहते हैं या आगे को लेकर डर बना रहता है। समस्या छोटी होती है, मन उसे बार-बार सोचकर बड़ा बना देता है। यही आदत धीरे-धीरे ओवरथिंकिंग बन जाती है। कुरुक्षेत्र में अर्जुन भी अपने मन की दुविधा से घिरे थे। श्रीकृष्ण ने जो मार्ग बताया, उसमें आज के बेचैन मन के लिए भी साफ सीख है। भगवद्गीता के अनुसार, विचार आना स्वाभाविक है, हर विचार को पकड़कर बैठना जरूरी नहीं।मन को मालिक नहीं, साधन समझें मन ताकतवर है, लेकिन बिना लगाम के छोड़ दें, तो एक विचार से दूसरे विचार तक खींचता रहता है। कभी बीता कल सताता है, कभी आने वाला कल डराता है। वर्तमान बीच में छूट जाता है। गीता का भाव है कि अभ्यास से मन साधा जा सकता है। विचार आना स्वाभाविक ...
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