नई दिल्ली, मई 26 -- 26 मई 2026 के सुबह का सुविचार हमें याद दिलाता है कि सफलता कोई संयोग नहीं, बल्कि अनुशासन और त्याग का परिणाम है। पढ़ाई के समय अगर हम कुछ जरूरी चीजों से दूरी बना लें, तो ज्ञान की राह बहुत आसान हो जाती है। आचार्य चाणक्य ने चाणक्य नीति में विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण सूत्र दिया है:'कामक्रोधौ तथा लोभं स्वादु श्रृंगारकौतुरके।अतिनिद्रातिसेवे च विद्यार्थी ह्यष्ट वर्जयेत्।।' अर्थ: विद्यार्थी को काम, क्रोध, लोभ, स्वादिष्ट भोजन, श्रृंगार, हंसी-मजाक, अधिक नींद और शरीर की अधिक सेवा - इन आठों से दूर रहना चाहिए। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो विद्यार्थी इन आठों व्यसनों से बच जाता है, वही सच्चा ज्ञान प्राप्त कर पाता है। आइए इन आठों बातों को विस्तार से समझते हैं।काम, क्रोध और लोभ - तीन सबसे बड़े दुश्मन विद्यार्थी जीवन में काम-वासना...