नई दिल्ली, अप्रैल 7 -- आज 7 अप्रैल 2026 का यह सुविचार हमें मातृत्व की व्यापकता की याद दिलाता है। आचार्य चाणक्य ने कहा है कि हर व्यक्ति की एक नहीं, पांच माताएं होती हैं। उन्होंने मां के सम्मान को केवल जन्म देने वाली मां तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे और भी व्यापक रूप दिया। चाणक्य नीति का यह श्लोक आज भी प्रासंगिक है:राजपत्नी गुरोः पत्नी मित्र पत्नी तथैव च।पत्नी माता स्वमाता च पञ्चैता मातरः स्मृता।।चाणक्य नीति में पांच माताओं का महत्व चाणक्य के अनुसार मां का दर्जा केवल जन्म देने वाली महिला तक सीमित नहीं है। उन्होंने पांच प्रकार की माताओं का उल्लेख किया है, जिनका सम्मान करना हर व्यक्ति का धर्म है। यह श्लोक हमें सिखाता है कि सम्मान और कृतज्ञता का भाव केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जीवन में आने वाली हर उस महिला के प्रति होना चाहि...