नई दिल्ली, मार्च 7 -- गुस्सा एक ऐसी भावना है जो हर इंसान को कभी-ना-कभी आती है। लेकिन जब यही गुस्सा बार-बार या ज्यादा बढ़ जाता है तो यह रिश्तों, फैसलों और जीवन की शांति को नुकसान पहुंचा सकता है। कई बार गुस्से में लिया गया फैसला बाद में पछतावे का कारण बन जाता है। भारतीय ग्रंथ भगवद गीता जीवन की कई समस्याओं का समाधान देती है। इसमें मन को शांत रखने, भावनाओं को संतुलित करने और क्रोध पर नियंत्रण पाने के कई मार्ग बताए गए हैं। गीता के कुछ श्लोक हमें बताते हैं कि गुस्से से कैसे बचा जाए और शांत मन के साथ जीवन जिया जाए। आइए जानते हैं ऐसे ही 5 महत्वपूर्ण श्लोक और उनका सिंपल मीनिंग।1. सुख-दुख में संतुलित मन रखना दु:खेष्वनुद्विग्नमना: सुखेषु विगतस्पृह: | वीतरागभयक्रोध: स्थितधीर्मुनिरुच्यते || (अध्याय 2, श्लोक 56)इस श्लोक में भगवान कृष्ण कहते हैं कि जो व...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.