नई दिल्ली, जून 20 -- सच्चा सम्मान शब्दों में नहीं, व्यवहार में छिपा होता है। जिसका सम्मान करते हैं, उसे कभी पैरों से नहीं छूना चाहिए। आज 20 जून 2026 की शाम का सुविचार हमें याद दिलाता है कि छोटी-सी लापरवाही भी जीवन में बड़े पाप का कारण बन सकती है। सम्मान की भावना रखें, क्योंकि यही हमें सही इंसान बनाती है। आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में कई ऐसी बातें बताई हैं, जो आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि कुछ चीजें और लोग इतने पवित्र होते हैं कि उन्हें गलती से भी पैर नहीं लगाना चाहिए। ऐसा करने से ना सिर्फ पाप लगता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों तक उसका प्रभाव पड़ता है।चाणक्य का नीति महत्वपूर्ण श्लोकपादाभ्यां न स्पृशेदग्निं गुरु ब्राह्मणमेव च।नैव गां न कुमारीं च न वृद्धं न शिशुं तथा।। इसका अर्थ है कि अग्नि, गुरु, ब्राह्मण, गाय, कुमार...