नई दिल्ली, मार्च 20 -- आज के दौर में लोग लीडरशिप को पावर, फेम और पद से जोड़ते हैं। यह माना जाता है कि जो ऊंचे पद पर है, वही सच्चा लीडर है। लेकिन भगवद गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने लीडरशिप का एक बिल्कुल अलग और गहरा नजरिया बताया है। उनके अनुसार, एक अच्छा और सच्चा लीडर वही है जो अपने कर्म, धैर्य और निस्वार्थ भाव से दूसरों को प्रेरित करता है, ना कि सिर्फ शब्दों से। जो खुद उदाहरण बनता है, कठिनाइयों से नहीं डरता और बिना फल की चिंता किए अपना कर्तव्य निभाता है।भगवद गीता के खास मंत्र -1. जैसा लीडर करेगा, वैसा ही लोग सीखेंगे! "यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः." इस श्लोक में बताया गया है कि जो महान व्यक्ति करता है, लोग वही फॉलो करते हैं। इसका मतलब है कि एक लीडर को अपने व्यवहार और कर्मों से उदाहरण बनना चाहिए। लोग आपकी बातों से ज्यादा आपके काम को देख...
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