नई दिल्ली, मार्च 10 -- आचार्य चाणक्य ने चाणक्य नीति में जीवन की उन परिस्थितियों को बहुत स्पष्ट रूप से बताया है, जिनमें व्यक्ति गलत निर्णय लेकर खुद को दुख और अपमान की स्थिति में डाल लेता है। मूर्खता, जवानी का अंधा जोश और पराए घर में रहना, ये तीन बातें जीवन को कष्टमय बना सकती हैं। अगर इनका सही समय पर ध्यान रखा जाए, तो व्यक्ति ना केवल परेशानियों से बच सकता है, बल्कि सफलता और सम्मान भी प्राप्त कर सकता है।कष्टं च खलु मूर्खत्वं कष्टं च खलु यौवनम्।कष्टात् कष्टतरं चैव परगेहे निवासनम्।। चाणक्य ने इस एक श्लोक में जीवन के तीन सबसे बड़े कष्टों को बता दिया है। आइए आज के सुविचार के माध्यम से इन कष्टों को समझते हैं और इनसे बचने के सरल उपाय जानते हैं।मूर्खता से बड़ा कोई कष्ट नहीं चाणक्य कहते हैं - कष्टं च खलु मूर्खत्वं अर्थात् मूर्ख या अज्ञानी होना सबसे ...
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