नई दिल्ली, अप्रैल 19 -- चाणक्य नीति में आचार्य चाणक्य ने धन कमाने और बचाने के गहरे राज बताए हैं। एक श्लोक में वे स्पष्ट रूप से कहते हैं:अन्यायोपार्जितं द्रव्यं दश वर्षाणि तिष्ठति।प्राप्ते एकादशे वर्षे समूलं च विनश्यति।। अर्थात् अन्याय से कमाया हुआ धन केवल दस वर्ष तक टिकता है, ग्यारहवें वर्ष में जड़ समेत नष्ट हो जाता है। यह श्लोक हमें याद दिलाता है कि धन की कमाई का तरीका जितना महत्वपूर्ण है, उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है उस धन को सही तरीके से बचाना और उपयोग करना। आज के Quote of the Day में चाणक्य नीति के इस श्लोक के आधार पर उन गलतियों और सही आदतों पर चर्चा करेंगे, जिनसे कमाया धन सुख नहीं, बल्कि दुख का कारण बन जाता है।अन्याय से कमाया धन क्यों टिकता नहीं? आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जब धन गलत तरीके से कमाया जाता है - चाहे वह धोखा, झूठ, किसी का ...