नई दिल्ली, अगस्त 28 -- इंसान अक्सर अपनी पहचान को नाम, चेहरा, पद और शरीर से जोड़कर देखता है। उम्र बढ़ती है, रूप बदलता है, फिर भी हम उसी बाहरी आवरण को पूरा सच मान लेते हैं। नीम करौली बाबा की सीख इस सोच को हिला देती है। उनके अनुसार शरीर केवल माध्यम है। असली पहचान आत्मा से जुड़ी है। जो आंखों से दिखता है वही पूरा अस्तित्व नहीं होता है। यह बात जीवन और मृत्यु दोनों को देखने का ढंग बदल सकती है।शरीर दिखता है आत्मा नहीं हम हर व्यक्ति को उसके शरीर से पहचानते हैं। चेहरा, आवाज और चाल से लगता है कि हम उसे जान गए। लेकिन शरीर बदलता रहता है। शक्ति घटती है और एक दिन शरीर समाप्त भी हो जाता है। आत्मा को आध्यात्मिक परंपरा में शरीर से अलग सूक्ष्म तत्व माना गया है। नीम करौली बाबा का भाव यही है कि किसी को केवल बाहरी रूप देखकर आंकना अधूरा है। शरीर एक वस्त्र की तर...