नई दिल्ली, जुलाई 24 -- 24 जुलाई 2026 की सुबह का यह सुविचार हमें याद दिलाता है कि बाहरी सफलता से ज्यादा महत्वपूर्ण है मन की शांति। आज का दिन अपने भीतर झांकने और उन बातों से बचने का है, जो हमें चुपचाप कमजोर कर देती हैं। आचार्य चाणक्य ने हजारों साल पहले जो बात कही थी, वह आज भी उतनी ही सही है।चाणक्य नीति का महत्वपूर्ण श्लोकआचार्य चाणक्य ने लिखा है -कान्तावियोग: स्वजनापमान: ऋणस्य शेष: कुनृपस्य सेवा।दरिद्रभावो विषमा सभा च विनाग्निनैते प्रदहन्ति कायम्।। इसका अर्थ है कि पत्नी से बिछुड़ना, अपने लोगों से अपमानित होना, कर्ज चढ़े रहना, दुष्ट मालिक की सेवा करना, गरीबी में रहना और स्वार्थी लोगों के बीच रहना - ये सब बिना आग के ही इंसान को जला देते हैं। ये बातें शरीर नहीं, मन को खोखला कर देती हैं।अपनों से मिला अपमान सबसे गहरा होता है जब अपने परिवार या कर...