नई दिल्ली, मई 14 -- आचार्य चाणक्य ने कई बातों को लेकर ज्ञान दिया है, उनके श्लोक इतने सहज होते हैं कि आसानी से सभी के समझ में आ जाते हैं। यहां भी हम आपको आचार्य चाणक्य के श्लोक के जरिए आपको काफी चीजों के बारे में बताएंगे। वित्तं देहि गुणान्वितेषु मतिमन्नान्यत्र देहि क्वचित्‌ प्राप्तं वारिनिधेर्जलं घनमुखे माधुर्ययुक्तं सदा | जीवान्‌ स्थावरजंगमांश्च सकलान्‌ सञ्जीव्य भूमण्डले भूयः पश्य तदेव कोटिगुणितं गच्छन्तमम्भोनिधिम्‌ ।| बुद्धिमान्‌ लोग जो हैं, वो इस बात को अच्छे से समझ लें कि वो धन सिर्फ गुणी लोगों को दे, अन्य को किसी को नहीं, क्योंकि गुणी व्यक्ति ही धन का सही इस्तेमाल करना जानते हैं। जब समुद्र का जल बादल के मुख में जाता है तो मधुर बन जाता है। भूलोक में सभी प्राणियों और स्थावर और जंगलों को जीवन प्रदान कर पुनः करोड़ गुणा बने हुए उसे समुद्र...