पूर्णिया, सितम्बर 30 -- Purnia News: पूर्णिया, वरीय संवाददाता। बुढ़न...। बचपन में ही अभिभावकों ने यह नाम रख दिया। तभी से लोग बुढ़न ही बोलने लगे। बचपन में भले यह नाम गंवारा लगता था लेकिन अब कोई गिला नहीं। आखिर एक न एक दिन सबको बुजुर्ग तो होना ही है। जीवन के 70 वें बसंत में बुढ़न सुनकर बुजुर्ग होने का बोध और बढ़ जाता है। जीवन के इस पल को भी व्यतीत करने का सबका अपना-अपना अंदाज है। एक अक्टूबर को हर साल बुजुर्ग दिवस मनाया जाता है। आज जो जवान हैं कल वह बुजुर्ग भी होंगे। पूर्णिया जिले में करीब एक चौथाई आबादी अब बुजुर्गों (60 प्लस) की हो गयी है। जिला में तीन लाख से अधिक बुजुर्गों को सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत अलग-अलग पेंशन की सुविधा मिल रही है। मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना के तहत 1100 की राशि बुजुर्गों को मिलती है। इस सुविधा को एक लाख से अधि...