प्रयागराज, अगस्त 27 -- Prayagraj News: हिन्दुस्तानी एकेडेमी की ओर से फिराक गोरखपुरी की जयंती की पूर्व संध्या पर मुशायरे का आयोजन किया गया। मां सरस्वती की प्रतिमा व फिराक गोरखपुरी के चित्र पर माल्यार्पण से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। लखनऊ विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के डॉ. फाजिल अहसन हाशमी ने कहा कि फिराक की शायरी इश्क का काव्यशास्त्र है। इनकी शायरी जज्बात से पैदा होने वाले शब्द की तलाश है। मंच पर मिस्बाह इलाहाबादी ने शेर 'बहुत से लोग कहते हैं कि शीरी है जबां उर्दू, उसी शीरी जबां का नाम अपने साथ लायी हूं' पढ़ा। अतिया नूर ने 'गजल की बात जब उर्दू में छेड़ी जाएगी, हमें फिराक कि फिर याद बहुत आएगी' शेर सुनाकर वाहवाही लूटी। डॉ. नीलिमा मिश्रा ने पंक्तियां 'जिंदगी इम्तिहान तक पहुंची आशिकी राष्ट्रगान तक पहुंची' पढ़ी। मुशायरे में मखदूम फूलपुरी, कुमार...