प्रयागराज, अक्टूबर 12 -- Prayagraj News: कबीर केवल संत या कवि नहीं, बल्कि जन विचारक थे। उन्होंने अपनी वाणी और विचारों से भारतीय समाज को लोकतांत्रिक बनाने का काम किया। कबीर के बीजक में लगभग ढाई सौ बार राम शब्द आया है, लेकिन उनका राम आत्मराम है। यह बातें पारख संस्थान के मुख्य प्रवक्ता देवेंद्र दास ने सोमवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग स्थित धीरेंद्र वर्मा सभागार में कहीं। वह 'कबीर : लोकधर्मी चेतना और उनकी वैचारिकी' विषय पर व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे। देवेंद्र दास ने अकादमिक संस्थानों में कबीर से संबंधित पाठ्यक्रम में संशोधन की आवश्यकता बताई। अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. भूरेलाल ने कबीर के मूल पाठ में प्रक्षेपण पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कबीर लोकजागरण के सच्चे कवि थे, रहस्यवादी नहीं। उनके महत्व को कम करने के लिए...