प्रयागराज, अक्टूबर 25 -- Prayagraj News: कबीर आश्रम, प्रीतमनगर में आयोजित 49वें वार्षिक अधिवेशन के दूसरे दिन रविवार को मन की निर्मलता, आत्मचिंतन और सदाचार का संदेश दिया गया। अधिवेशन की शुरुआत कबीर वाणी के मूलग्रंथ बीजक के सस्वर पाठ से हुई। छत्तीसगढ़ से आईं साध्वी साक्षी ने प्रवचन में कहा कि अपने मन को निर्मल बनाना ही कबीर साहब की सच्ची पूजा है। निर्मल मन वाला व्यक्ति जीते-जी स्वर्ग का अनुभव करता है। मन की पवित्रता केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है बल्कि यह हमारे विचारों, व्यवहार व दूसरे के प्रति दृष्टिकोण में भी दिखाई देना चाहिए। लखनऊ से आईं साध्वी राजेश्वरी ने कहा कि अपने भीतर मौजूद विचारों के कचरे को साफ-साफ देख लेना ही साधना की शुरुआत है। यह भी पढ़ें- Prayagraj News: प्रेम, करुणा, संवेदना के बिना ज्ञान निरर्थक : साध्वी समता गुजरात की साध्...